ग्रा. पं. चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियोंके भाग्य का फैसला आज

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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खामगांव तहसील की 16 ग्राम पंचायतों में चुनाव हो रहे हैं और मतदान 18 दिसंबर को होगा. इसलिए चुनाव जीतने की रणनीति के तहत चुनाव से एक रात पहले बंद कमरे में बैठकें की गई. साथ ही कुछ गांवों में पैसे के इस्तेमाल की भी चर्चा है.

हालांकि ग्राम पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों की सीधी 'एंट्री' नहीं होती, लेकिन गांवों में पैनल किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े होते हैं. शुक्रवार को चुनाव प्रचार के अंतिम दिन शाम साढ़े पांच बजे प्रचार तोपें थम गईं. नतीजतन, नेताओं ने अब बंद दरवाजे की बैठकों और समझौतों पर जोर दिया. उम्मीदवारों ने वास्तविक मतदाताओं से मिलने और वोट मांगने पर ध्यान केंद्रित किया. साथ ही कुछ गांवों में मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए गए.

क्यूकी यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की जिला परिषद, पंचायत समिति के नेताओं ने जिस ग्राम पंचायत पर उनका दबदबा है, उसे जिताने के लिए शनिवार को दिन भर बंद कमरे में बैठकें कीं. अपने-अपने पैनल के प्रत्याशी जिताने की कोशिश जारी है.

चौकट

 *सरपंच पद का सीधा चुनाव* 

इस साल पहली बार सरपंच पद का सीधा चुनाव हो रहा है. खामगांव तालुका में मतदाता 16 ग्राम पंचायतों से सीधे सरपंच का चुनाव करेंगे. इसलिए स्थानीय नेता घर-घर जाकर प्रचार दिनों से मतदाताओं से मिलने का सिलसिला शाम जैसे ही प्रचार थमा अपनी रणनीति बनाने में भिड़े दिखे.

चौकट दोन

 *मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने के लिए वाहनों कर रहे हैं और पिछले 5 की व्यवस्था* 

• मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए जारी है. शुक्रवार की वाहनों की व्यवस्था की गई है, मतदाताओं को उनका मतदान केंद्र कहां है यह बताकर मतदान वैसे ही सब अपनी- केंद्रों तक ले जाने के लिए कई कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया गया है.

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