यह फ़िक्र मुझे चैन से सोने नहीं देता अब कौन मेरी काम को बदर करेगा

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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यह एक है कहानी आम जनता को है सुनी   अंग्रेज़ों ने जब मुल्क में नई नई ट्रेन चलाई तो एक पीर साहब रोज़ाना ट्रेन देखने चले जाते, उनके मुरीदों ने एक दिन पुछ ही लिया आप रोज़ाना ट्रेन देखने क्यों चले आते हैं 
पीर साहब ने जवाब में कहा मुझे इस ट्रेन के इंजन से मोहब्बत हो गई है ! 

मुरीदों नें पुछा क्यों मोहब्बत हो गई है ? 

जवाब में कहा इसकी कुछ वजह है; पहली वजह है ट्रेन का इंजन अपनी मंज़िल तक पहुँच कर ही रुकता है. दूसरी वजह है, ये अपने हर डिब्बे को साथ लेकर चलता है. तीसरी वजह है, ये आग ख़ुद खाता है; डिब्बों को खाने नहीं देता. चौथी वजह है, ये अपने तय शुदा रास्ते से नहीं भटकता और पाँचवी वजह है, ये पांचवीं वजह सस्पेंड में है
 हमारी क़ौम के लीडर को भी ट्रेन के इंजन जैसा होना चाहिए यहां तो हर हमेशा अपने आप को कम के रहनुमा वह रहबर बताने वाले लोग हमेशा काम का सौदा ही कर रहे हैं हमारे आने वाली नस्लों के लिए नहीं तो अच्छे ढंग से एजुकेशन के लिए कोई स्कूल कॉलेज है और ना ही कोई रोजगार है हमारे काम  के लीडरों सिर्फ और सिर्फ अपना ही घर भरने का काम कर रहे है और हर हमेशा कॉम का सौदा ही किया है अब अवाम को आम जनता को भी आंखें खोलने का टाइम आ गया है अगर अब आपको अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना है तो आने वाली नगर परिषद इलेक्शन में इनको इनकी जगह दिखानी होगी वह वाक्य तो एक पीर साहब का है लेकिन वह सच्चा वाक्य है हर लीडर रहनुमा को एक इंजन के जैसा ही होना चाहिए जो बाकी अपने काम के साथ लेकर चले विधानसभा का इलेक्शन होने के बाद में सभी लीडर वह बरसादी सीदौड़ अब गायब हो चुके हैं आम जनता के कामों के लिए भी नजर नहीं आ रहे हैं जब नगर परिषद का इलेक्शन आएगा तब सभी लोगों को आम जनता की याद आएगी और वह सब लोग भी आम जनता को लुभाने के लिए लोगों से दुआ सलाम वह मैयत की जगह जाना वह दवा खाने में जाना वह पुलिस स्टेशन में जाना शुरू कर देंगे और उन लोगों से भी सावधान रहने की जरूरत है जो गुरु मुसलमान के नाम पर अपना राजकरण चमकते हैं और चंद सिक्कों के लिए अपना ईमान बेचते हैं और बाकी उन गंदी नाली के  कीड़े से भी सावधान रहने की जरूरत है जो इलेक्शन के टाइम में वलवल करने वाले हैं उन दलालों से भी सावधान होने की जरूरत है आम जनता को..... ना उनकी ना इन की  यह हमेशा अपने मतलब की खोज में रहते हैं हमने देखा है हर हुकूमत में चमचे हर घड़ी मौज में रहते हैं....

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