मलकापुर |
नेशनल राजनीतिक पार्टियों के अपने तय प्रोटोकॉल और संविधान होते हैं। पार्टी यह दावा करती है कि संगठन में वही व्यक्ति आगे बढ़ता है जो सालों से मेहनत करता है, जनता के बीच रहता है और पार्टी की विचारधारा के लिए संघर्ष करता है।
लेकिन मलकापुर शहर में इन दिनों जो चर्चा चल रही है, वह इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
सवाल यह है कि नगर परिषद में कप्सन में मेंबर” किसे बनाया जाना चाहिए?
👉 क्या उसे,
जो सालों से संगठन से जुड़ा हुआ है?
जो बिना किसी लालच के पार्टी के लिए मेहनत करता है?
जो चुनाव हार गया लेकिन दूसरे नंबर पर रहकर जनता का भरोसा साबित कर चुका है?
या फिर उसे,
👉 जो मोटी रकम देने को तैयार हो?
मलकापुर शहर में खुलकर चर्चा है कि कप्सन में मेंबर बनाने के लिए 20 लाख, 25 लाख, यहां तक कि 30 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है
अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ पार्टी नहीं बल्कि लोकतंत्र की नीलामी है
नेशनल पार्टियों के प्रोटोकॉल साफ कहते हैं कि
संगठन में निष्ठा और निरंतर काम करने वालों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए
चुनाव में दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार को सम्मान और अवसर दिया जाना चाहिए
पैसे, सिफारिश और दलाली का कोई स्थान नहीं होना चाहिए
लेकिन मलकापुर में सवाल यह है
क्या यहां प्रोटोकॉल से निर्णय हो रहे हैं या पैसों से
अगर कप्सन में मेंबर भी खरीद-फरोख्त से बनेंगे, तो फिर आम कार्यकर्ता का भविष्य क्या होगा
जो सालों तक झंडा उठाता है, गली-गली जाता है, जनता की आवाज़ बनता है उसे क्या मिलेगा
आज जरूरत है कि
पार्टी नेतृत्व इन चर्चाओं पर खुलकर जवाब दे
जांच हो कि पैसों की मांग कौन कर रहा है
और यह साफ किया जाए कि संगठन मेहनत से चलता है, न कि नोटों से
वरना मलकापुर की जनता यह सवाल पूछने के लिए मजबूर होगी—
यह राजनीति है या ठेकेदारी ऐसी मलकापुर शहर में चर्चा चल रही है

