मलकापुर नगर परिषद चुनाव में निर्वाचित हुए भाई अशांत जी वानखेडे आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र से निकलकर जनसेवा तक का उनका सफ़र संघर्ष, ईमानदारी और सिद्धांतों से भरा रहा है। वर्षों तक पत्रकारिता करते हुए उन्होंने हमेशा आम जनता की आवाज़ को प्राथमिकता दी और सत्ता, सिस्टम व समाज के बीच एक सेतु की भूमिका निभाई।
पत्रकारिता के दौरान न केवल उन्होंने सच्चाई को बेबाकी से सामने रखा, बल्कि पत्रकारों के मान-सम्मान और एकता को भी हमेशा सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि आज मलकापुर शहर की आम जनता उन्हें सिर्फ एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि अपना नेता मानती है।
हाल ही में नगर परिषद सदस्य बनने के बाद भाई अशांत जी वानखेडे द्वारा पत्रकारों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि पद बदल सकता है, लेकिन संस्कार और सोच नहीं। पत्रकारिता से आए इस जनप्रतिनिधि ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हमेशा सम्मान का अधिकारी है।
संविधान, कायदा-कानून और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ रखने वाले भाई अशांत जी वानखेडे की कार्यशैली में संतुलन, संवाद और संवेदनशीलता साफ झलकती है। यही वजह है कि वे हर समाज, हर वर्ग और हर उम्र के लोगों के दिल में जगह बनाए हुए हैं।
मलकापुर शहर में उनका एक अलग ही रुतबा और मरतबा है—जो न तो दिखावे से बना है और न ही किसी प्रचार से, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और जनहित के कामों से हासिल हुआ है।
आज जब राजनीति में भरोसे का संकट देखा जा रहा है, ऐसे समय में भाई अशांत जी वानखेडे जैसे जनप्रतिनिधि मलकापुर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरे हैं मुख्य संपादक शब्द की गूंज न्यूज़ खबर शेख जमील शेख जान मोहम्मद मलकापुर

