अजित दादा पावर की प्लेन हादसे में हुई मौत पर उठने लगे हैं सवाल आम जनता चाहती है कि इसकी निष्पक्ष से जांच हो

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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 अजित पवार, (विजय) रूपाणी और गोपीनाथ मुंडे से जुड़ी एक्सीडेंट वाली खबर यह क्या वाकई में एक हादसा है या फिर सोची समझी साजिश ऐसी आम जनता में बहुत जोरों से चर्चा शुरू है

इसलिए खबरें और अनसुलझे हादसों पर सवाल के लिए जिम्मेदार कौन है इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है आम जनता के लिए लेकिन बेहद तीखे अंदाज़ में लिख रहा हूँ  ताकि बात भी पहुँचे और सच्चाई भी सरकार सामने ले सही तरीके की जांच करके

 तीखी (सवालों के साथ)

देश में जब-जब किसी बड़े नेता या बड़े हादसे की खबर सामने आती है,

तब-तब जनता के मन में एक ही सवाल उठता है 

यह सच में हादसा है… या फिर एक सोची समझी साजिश है 

इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ कथित खबरें वायरल हो रही हैं,

जिनमें बड़े नेताओं के नाम लेकर

हवाई हादसों और रहस्यमयी मौतों की बातें की जा रही हैं

हालाँकि इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,

लेकिन सवाल उठना गलत भी नहीं है

देश ने पहले भी कई ऐसे मामले देखे हैं

जहाँ सच्चाई आज तक पूरी तरह सामने नहीं आ सकी

 पुलवामा हमला 

40 जवान शहीद हुए,

लेकिन आज भी यह सवाल ज़िंदा है

कि इतनी बड़ी चूक के ज़िम्मेदार कौन थे?

जांच कहाँ पहुँची?

 नेताओं और वीआईपी मूवमेंट से जुड़े हादसे 

कहीं सड़क दुर्घटना,

कहीं संदिग्ध परिस्थितियाँ,

लेकिन हर बार जवाब अधूरे

जब आम आदमी से गलती हो जाए

तो तुरंत FIR, जांच और कार्रवाई होती है,

तो फिर बड़े नामों से जुड़े हादसों में

जांच की रफ्तार क्यों थम जाती है?

क्या इसलिए कि सवाल पूछने वाले

“देशद्रोही” कहे जाने लगते हैं?

यह न्यूज़ किसी पर आरोप नहीं लगाती,

लेकिन यह ज़रूर पूछती है 

हर बड़े हादसे की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच क्यों नहीं?

 रिपोर्ट्स सार्वजनिक क्यों नहीं की जातीं?

 सवाल पूछना गुनाह कब से हो गया?

देश को अफवाह नहीं,

सच्चाई चाहिए

भावना नहीं,

जवाब चाहिए

जब तक हर बड़े हादसे की

निष्पक्ष जांच नहीं होगी,

तब तक जनता के मन में

ये सवाल यूँ ही गूंजते रहेंगे

यह लोकतंत्र है,

यहाँ सवाल पूछना हक़ है 

और जवाब देना ज़िम्मेदारी ऐसी भी चर्चा मलकापुर शहर में चल रही है


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