मलकापुर शहर में समाजसेवा की मिसाल बने रफीक सेठ बर्तन वालों ने जुनी ईदगाह के काम का लिया बीड़ा कदम उठाया है

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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मलकापुर शहर में समाजसेवा और अच्छी सोच रखने वाले एक नई मिसाल बंद कर सामने आई है। रफीक सेठ बर्तन वाले, जिन्हें लोग सिद्दीक भाऊ के नक्शे कदम पर चलने वाला बता रहे हैं, उन्होंने  जुनी ईदगाह बनाने के लिए सभी आम जनता का साथ लिया है जिस तरह से सिद्धीक बहू ने नई ईदगाह बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लेकर मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि पूरे शहर के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

इससे पहले मलकापुर में मुस्लिम समाज के लिए नई ईदगाह का निर्माण कर सिद्दीक भाऊ ने जो काम किया था, उसी नक्शे कदम पर चलते हुए रफीक सेठ ने जुनी ईदगाह की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा और समझा। जुनी ईदगाह का काम लंबे समय से चर्च में था उसे चीनी ईदगाह पर कई नौजवान पान-गुटखा खाकर थूकते हुए और मोबाइल देखते हुए समय बर्बाद कर रहे थे, जिससे वहां का माहौल बिगड़ता जा रहा था।

रफीक सेठ ने इस स्थिति को केवल देखकर नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि यह महसूस किया कि अगर उसी स्थान पर ईदगाह कंपाउंड बनेगी तो न सिर्फ धार्मिक आवश्यकता पूरी होगी, बल्कि युवाओं को भी सही दिशा मिलेगी और समाज में अनुशासन व एकता का माहौल बनेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने आम जनता को साथ लेकर ईदगाह निर्माण का निर्णय लिया।

यह उल्लेखनीय है कि शहर में खुद को मुस्लिम समाज का रहनुमा बताने वाले कई लोग वर्षों से समाज के नाम पर राजनीति और कमाई करते रहे, लेकिन किसी ने भी जुनी ईदगाह या समाजिक ज़रूरतों के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा। ऐसे समय में रफीक सेठ बर्तन वालों का आगे आना यह साबित करता है कि सच्ची रहनुमाई पद या प्रचार से नहीं, बल्कि ज़मीनी काम से पहचानी जाती है।

रफीक सेठ की यह पहल सिर्फ मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हर समाज की सोच रखने वाले, भाईचारे और एकता में विश्वास रखने वाले इंसान हैं। सिद्दीक भाऊ की तरह उन्होंने भी यह दिखा दिया कि अगर नीयत साफ हो तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

आज मलकापुर शहर में रफीक सेठ बर्तन वाले का नाम सम्मान के साथ लिया जाता रहा है और उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए एक मिसल बनेगी ऐसी मलकापुर शहर में चर्चा चल रही है

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