मलकापुर नगर परिषद के नए शिक्षण सभापति भाई अशांत जी वानखेडे उर्दू स्कूलों की तरफ ध्यान देंगे क्या

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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मलकापुर शहर नगर परिषद में हाल ही में भाई अशांत जी वानखेडे को शिक्षण सभापति की जिम्मेदारी सौंपी गई है उनके इस नए पदभार के बाद शहर की जनता, खासकर अभिभावक और शिक्षाविदों की निगाहें अब मलकापुर की शिक्षा व्यवस्था पर टिक गई हैं

शहर की सरकारी उर्दू स्कूलों की स्थिति आज भी गंभीर बनी हुई है। कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, और जो शिक्षक पदस्थ हैं, उन पर यह गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने निजी कारोबार और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि

“सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पहले ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऊपर से अगर शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि

क्या शिक्षण सभापति भाई अशांत जी वानखेडे साहब इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कदम उठाएंगे?

क्या बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी?

और क्या उर्दू स्कूलों में रिक्त शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी?

भाई अशांत जी वानखेडे का अब तक का सामाजिक और पत्रकारिता से जुड़ा अनुभव यह उम्मीद जरूर जगाता है कि वे इस जिम्मेदारी को केवल पद न मानकर कर्तव्य समझेंगे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस निर्णय लेंगे

मलकापुर की जनता को अब जवाब नहीं, बल्कि कार्रवाई की उम्मीद है

शिक्षण सभापति के रूप में भाई अशांत जी वानखेडे साहब की पहली परीक्षा शहर की सरकारी स्कूलों की सुधारना होगी

अब देखना यह है कि क्या मलकापुर की शिक्षा व्यवस्था वाकई बदलेगी,

या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा ऐसी मलकापुर शहर में चर्चा चल रही है

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