मलकापुर शहर में चर्च का विषय शिक्षा बनी राजनीति का अखाड़ा? बच्चों का भविष्य दांव पर

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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मलकापुर शहर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई स्कूलों में शिक्षा का मंदिर अब धीरे-धीरे राजनीतिक अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। आरोप है कि कुछ शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान राजनीतिक लोगों के इशारों पर काम कर रहे हैं, जिससे सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

शहर में यह देखने में आ रहा है कि स्कूलों के अंदर बार-बार राजकीय और राजनीतिक लोगों को बुलाकर उनका सम्मान किया जा रहा है। शिक्षा के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक चमक-दमक और फोटोसेशन के लिए किया जा रहा है, जबकि उसी समय बच्चों की शिक्षा, गुणवत्ता और भविष्य की अनदेखी हो रही है।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों को राजनीति का अड्डा बनाने के बजाय बच्चों के शैक्षणिक स्तर, संस्कार और प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर यही समय और संसाधन शिक्षा सुधार में लगाए जाएं, तो मलकापुर का शैक्षणिक स्तर कहीं बेहतर हो सकता है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ शिक्षक राजनीतिक दबाव में आकर निष्पक्ष भूमिका निभाने में असफल हो रहे हैं। शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है, लेकिन जब वही किसी राजनीतिक दल या नेता की कठपुतली बन जाए, तो इसका खामियाजा सीधे मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या माननीय शिक्षा अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे?

क्या स्कूलों को राजनीति से मुक्त कर शिक्षा का वास्तविक केंद्र बनाया जाएगा?

और अगर कोई शिक्षक या संस्था शिक्षा के नाम पर राजनीति कर रही है, तो क्या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी?

मलकापुर की जनता और अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षा को राजनीति से दूर रखा जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके। अब देखना यह है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कब और क्या कदम उठाता है। ऐसी चाचा मलकापुर शहर में चल रही है 

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