डी-ब्लॉक अखबारों पर सवाल: कागज छप रहा है, लेकिन वैधता का हिसाब कौन देगा और अधिकारी कब इसकी जांच करेंगे?

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
By -
0


मलकापुर शहर में चर्चा तेज है यदि किसी प्रकाशन की स्थिति वास्तव में ‘डी-ब्लॉक’ है, तो फिर उसके अंक की छपाई और वितरण किस आधार पर जारी है?

मलकापुर शहर में कुछ समाचारपत्रों को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। चर्चा है कि कुछ अखबारों की स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में ‘डी-ब्लॉक’  है उनके अंक फिर भी छापकर शहर में वितरित किए जा रहे है ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन अखबारों की वर्तमान वैधानिक स्थिति क्या है और इन्हें प्रकाशित व वितरित करने की अनुमति किस आधार पर मिल रही है?

मामला सिर्फ अखबार छापने तक सीमित नहीं है। शहर में यह भी चर्चा है कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में आम नागरिकों और शासकीय और राजकीय लोगों  पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं

सवाल सीधा है—अगर रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं है तो जांच से डर कैसा? संबंधित विभाग को चाहिए कि संबंधित प्रकाशनों का पंजीयन, घोषणा, प्रकाशन की स्थिति और वितरण की वैधता रिकॉर्ड के आधार पर जांचे और वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।

पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर नियमों की अनदेखी या किसी भी व्यक्ति पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच भी उतनी ही जरूरी है।

मलकापुर की जनता अब पूछ रही है—डी-ब्लॉक की सच्चाई क्या है, कौन से अखबार वैध रूप से प्रकाशित हो रहे हैं और कौन केवल कागज पर नहीं बल्कि हकीकत में भी नियमों के दायरे में हैं?

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)