जिन चिरागों से तसूफ का धुआं उठता है उन चिरागों को बुझा देना ही बेहतर है

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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मलकापुर शहर में आम जनता में ऐसी चर्चा चल रही है कि काम करने वालों को मौका दिया जाना चाहिए लेकिन  आज की चर्चा मलकापुर शहर से जुड़ी एक कड़वी सच्ची और हकीकत पर है

नगर परिषद चुनाव संपन्न हुए अभी कुछ दिन बीते है  लेकिन शहर की राजनीति में अब भी कुछ ऐसे चेहरे सक्रिय हैं, जो चुनाव से पहले और चुनाव के बाद सिर्फ एक ही चीज़ ढूंढते नज़र आते हैं वह है  हड्डी

मलकापुर में चुनाव लड़ना कोई खेल नहीं है

जो उम्मीदवार मैदान में उतरता है, वह अपने नसीब से और ऊपर वाले की मर्जी और अपनी मेहनत के दम पर उतरता है

वह अपने खून-पसीने की कमाई खर्च करता है, दिन-रात जनता के बीच रहता है और लोकतंत्र का सम्मान करता है।

लेकिन इसी बीच कुछ दलाल भी होते हैं 

जो हर चौखट पर जाकर लूसू-लूसू करते हैं,

हर दरवाज़े पर अपनी वफादारी बेचने को तैयार रहते हैं,

और अगर उन्हें चंद सिक्के या उनके फायदे की हड्डी नहीं मिली,

तो वही लोग सबसे पहले भोंकना शुरू कर देते हैं।

चुनाव से पहले भी भोंकना,

चुनाव के बाद भी भोंकना,

और खुद को बड़ा लीडर बताकर दूसरों की मेहनत पर सवाल उठते हैं  

क्या यही राजनीति है?

क्या लोकतंत्र दलालों और सौदेबाज़ों के भरोसे चलेगा?

क्या चुनाव लड़ने वाला हर उम्मीदवार इन भीख मांगने वाले बिचौलियों का कर्ज़दार है?

या फिर अब समय आ गया है कि जनता ऐसे “भोंकने वालों” को पहचान कर उन्हें उनकी औकात दिखाएगी 

मलकापुर की जनता समझदार है।

उसे पता है कौन मेहनत से खड़ा था

और कौन सिर्फ हड्डी की तलाश में घूम रहा है।

लोकतंत्र मेहनत से चलता है,

डराने और भोंकने से नहीं चलने वाली है 

इसी सवाल के साथ हमें आम जनता से पूछना चाहते हैं

आपकी राय हमारे लिए मायने रखती है।

अगर आप चाहें तो मैं इसे ज्यादा भी लिख सकता हूं क्योंकि हमारे पास इन दलालों की बहुत से कारनामे मौजूद है अगर इन्होंने भोकना बन नहीं किया तो हम इनके हर करनामें आम पब्लिक के सामने रखने से पीछे नहीं हटेंगे मुख्य संपादक शब्द की गूंज न्यूज़ बेबाक खबर मलकापुर जिला बुलढाणा जनता की आवाज है यह

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