पत्रकारिता कोई पहचान पत्र नहीं
और पत्रकारिता किसी के गले में टंगा हुआ कार्ड भी नहीं है
पत्रकारिता एक ज़िम्मेदारी है
सच के साथ खड़े रहने की हिम्मत है
और सत्ता से सवाल पूछने का साहस है
लेकिन आज मलकापुर शहर में एक गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है
क्या को कुछ अपने आप को पत्रकार कहने वाला” लोग क्या सच में पत्रकार होता है?
शहर में खुलेआम चर्चा है कि
कुछ लोग जिनके अख़बार RNI और PRGI (या संबंधित विभाग) द्वारा डी-ब्लॉक किए जा चुके हैं,
जिनके प्रकाशन पर कानूनी रोक लग चुकी है,
फिर भी खुद को पत्रकार बताकर शहर में घूम रहे हैं।
👉 आरोप है कि ऐसे तथाकथित पत्रकारों पर कब करवाई होगी जो
– आम जनता को डराते हैं
– दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को ब्लैकमेल करते हैं
– अधिकारियों के नाम का सहारा लेकर वसूली करते हैं
– और पत्रकारिता की आड़ में अपना निजी धंधा चलाते हैं
यह पत्रकारिता नहीं,
पत्रकारिता के नाम पर अपराध है।
सच्चा पत्रकार कौन होता है?
✔ जो सत्ता से सवाल करे
✔ जो सच लिखे, चाहे उनका अपना नुकसान ही क्यों न हो
जो जन्मदिन, माला, फोटो और चाटुकारिता से दूर रहे
जो गरीब, पीड़ित और आम जनता की आवाज बने
जो किसी, व्यक्ति या अधिकारी की गोद में न बैठे
सच्चा पत्रकार बिकता नहीं
वह व्यवस्था को आईना दिखाता है।
प्रशासन से सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
❓ जिन अख़बारों के काग़ज़ात डी-ब्लॉक हो चुके हैं
❓ जिनकी कानूनी मान्यता समाप्त हो चुकी है
❓ जो नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं
उन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या प्रशासन की चुप्पी उन्हें संरक्षण दे रही है?
या फिर नियम सिर्फ ईमानदार पत्रकारों के लिए हैं?
आज ज़रूरत है
असली और नकली पत्रकार को पहचान करने की
क्योंकि जब नकली पत्रकार बच जाते हैं,
तो सच्ची पत्रकारिता बदनाम होती है
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई,
तो जनता का भरोसा पत्रकारिता से उठ जाएगा
🖊️ पत्रकारिता पेशा नहीं—जनसेवा है
और जो इसे धंधा बनाते हैं,
वे पत्रकार नहीं—पत्रकारिता के दुश्मन हैं
जिनके पेपर कभी-कभी बाई चांस निकलते हैं या फिर जो समय देखकर न्यूजपेपर निकलते हैं इसका मतलब यही है कि वह नकली पत्रकार है असली पत्रकारिता वह है जो हर हमेशा आम जनता के मुद्दे उठाए आम जनता की आवाज बनी अपनी कलम जब भी उठा चलाएं तो आम जनता की आवाज बंद कर लेकिन यहां कुछ पत्र का कमर्शियल बन चुके हैं जो सिर्फ अपने फायदे के लिए ही पत्रकारिता करते हैं अधिकारियों के पास जाकर बैठते हैं और कहते हैं हम पत्रकार है हमारा यह काम कर दो हमारा वह काम कर दो क्या अधिकारियों से भी इनके संबंध है क्या कागजात तैयार करने के लिए अधिकारियों से भी कुछ मनीराम का लेनदेन करते हैं ऐसी भी चर्चा मलकापुर शहर में चल रही है

