चंद सिक्कों में ज़मीर बेचने वाले कुछ कार्यकर्ता मलकापुर की राजनीति में अपना गद्दारी का खेल खेल रहे हैं
आज बात करेंगे उस सच्चाई की, जो धीरे-धीरे मलकापुर शहर की राजनीति में जड़ें जमा रही है जहां कुछ लोग खुद को कार्यकर्ता बताते हैं, लेकिन उनके कर्म शहर मे समाज के साथ गद्दारी करना उनका पैसा बन गया है
मलकापुर शहर में इन दिनों चर्चा है के कुछ कार्यकर्ताओं ज अच्छे कपड़े पहनकर, बड़ी-बड़ी बातें करके खुद को समाजसेवक साबित करने में लगे रहते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में ये लोग समाज की सेवा कर रहे हैं? या फिर अपनी गंदी सोच से अपना फायदा कर रहे हैं
सूत्रों के मुताबिक, कुछ लोग चंद पैसों के लालच में अपनी जमीर अपने उसूल और अपने खुद्दारी तक बेच देते हैं आम जनता से उधार लेकर पैसा लौटाना तो दूर, सामने आने से भी कतराते हैं दुकानदारों से माल-सामान लेते हैं, लेकिन भुगतान करने में टालमटोल करते हैं
स्थानीय लोगों की नाराज़गी:
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोग चुनाव के समय खुद को जनता का सच्चा सिपाही बताते हैं, लेकिन बाद सिर्फ अपने फायदे की राजनीति करते हैं
जनता पूछ रही है
क्या कार्यकर्ता होना सिर्फ कपड़े और दिखावे तक सीमित है?
क्या राजनीति अब सिर्फ चंद सिक्कों का सौदा बनकर रह गई है?
विशेष टिप्पणी:
राजनीति सेवा का माध्यम है, सौदेबाजी का नहीं
जो लोग समाज के भरोसे पर खरे नहीं उतरते, उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है
जनता सब देख रही है और वक्त आने पर जवाब भी देगी
मलकापुर की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और जवाबदेही की जरूरत है वरना गद्दारी और लालच का यह खेल शहर के भविष्य पर भारी पड़ सकता है ऐसी आम जनता में चर्चा है


