मलकापुर में सत्ता के साये में अपराधियों का बोलबाला?
आम जनता और पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिशों की चर्चा तेज
मलकापुर शहर के सत्ता गलियारों में इन दिनों एक गंभीर चर्चा जोरों पर है। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग पैसों के दम पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण दे रहे हैं और उनके माध्यम से शहर में डर का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है
सूत्रों के अनुसार, यह दबाव केवल आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ पत्रकारों को भी निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सच लिखने और सवाल पूछने की कीमत अब डर और धमकी के रूप में चुकानी पड़ेगी लेकिन यह उनकी भूल है सब पत्रकार एक जैसे नहीं होते हैं कुछ पत्रकारों के पास में क्रिमिनल माइंड के लोगों की जन्म कुंडली भी है अगर सोए हुए शेर को जगाने की कोशिश की गई तो पूरे फालना में ओपन किए जाएंगे
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर सत्ता का इस्तेमाल जनसेवा की बजाय दबाव और भय पैदा करने के लिए किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। लोकतंत्र में सत्ता जनता की आवाज़ सुनने के लिए होती है, न कि उसे दबाने के लिए।
इसी बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि किसी पत्रकार को उसके कर्तव्य पालन के दौरान धमकाया गया या नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई, तो संबंधित लोगों के खिलाफ “पत्रकार संरक्षण कानून” के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जानकारों का मानना है कि कानून सबके लिए समान है और यदि कोई भी व्यक्ति अपनी ताकत का दुरुपयोग करेगा, तो उसे कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
मलकापुर की जनता अब यह देखना चाहती है कि शहर में कानून का राज कायम रहेगा या फिर पैसों और प्रभाव के बल पर सच्चाई को दबाने की कोशिशें की जाएगी
शब्द की गूंज का सवाल:
क्या मलकापुर में लोकतंत्र की आवाज बुलंद रहेगी, या डर का साया गहराता जाएगा?
(यदि आपके पास इस विषय से जुड़ी कोई जानकारी या प्रतिक्रिया हो, तो हमें अवश्य भेजें आम जनता के लिए बुनियादी सुविधाओं की आवाज उठाना यह हक और सच्चाई लिखना अन्य वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखना और आवाज उठाना यही पत्रकार का धर्म है

