चमन में सबके लिए आत्मामैं थोड़ी है जैसा तुम चाहिए वैसा निजाम थोड़ी है वह झूठ बोल रहा है तो बोलने दो वह दुकानदार है कोई इमाम थोड़ी है जो तुम कहो वही लिखो जो तुम कहे वह बोल मेरा मिजाज तुम्हारा गुलाम थोड़ी है

शैख़ जमील मुख्य संपादक शब्द की गूंज
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मलकापुर शहर की सियासत इन दिनों गरमाई हुई है। नगर परिषद के नगर अध्यक्ष के कामकाज और राजकरण को लेकर चौक-चौराहों से लेकर चाय की टपरियों तक चर्चाओं का दौर जारी है। जनता के मन में सवाल भी हैं और नाराज़गी भी साफ दिखाई दे रही है कहते हैं

“चमन में सबके लिए आत्मामैं थोड़ी है,

जैसा तुम चाहिए वैसा निजाम थोड़ी है…”

मलकापुर की हकीकत भी कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। चुनाव के वक्त जो वादे किए गए थे, आज वही वादे जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। शहर की साफ-सफाई, पानी की समस्या और विकास के मुद्दे अभी भी जस के तस बने हुए हैं।

 और अब जनता ये भी कह रही है

“वो झूठ बोल रहा है तो बोलने दो उसे,

दुकानदार है कोई इमाम थोड़ी है…”

यानी आरोप ये लग रहे हैं कि सियासत अब सेवा नहीं, बल्कि सौदेबाजी का जरिया बनती जा रही है। आम जनता का भरोसा जिस उम्मीद पर टिका था, वही उम्मीद अब सवालों के घेरे में है।

 और आखिर में जनता का सीधा संदेश—

“जो तुम कहो वही लिखो, जो तुम कहो वही बोल,

मेरा मिजाज तुम्हारा गुलाम थोड़ी है…”

मलकापुर की जनता अब जागरूक हो चुकी है। वह सिर्फ सुनने वाली नहीं, बल्कि जवाब मांगने वाली बन चुकी है।

 अब देखने वाली बात ये होगी कि नगर परिषद का प्रशासन और नगर अध्यक्ष इन उठते सवालों का जवाब देते हैं या फिर ये सियासी गर्मी और बढ़ती जाएगी…

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