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धामणगांव बढे सादिक शेख ✍️
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राज्य भर में लंपी रोग का प्रकोप शुरु है. इस बीमारी से मरने वाले मवेशियों की संख्या आये दिन बढ़ रही है। चूंकि यह एक छूत की बीमारी है, टीकाकरण के बाद भी गांठ का संक्रमण हो सकता है। मोताला तहसील में लंपी स्किन रोग से करीब 528 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सा विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि 453 पशुओ पंचनामा कर के शासन को भेजा जा चुके हैं। तहसील में 65 ग्राम पंचायतें और 105 गाँव हैं। जहा लम्पि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तहसील की 5827 गोठो में छिड़काव किया गया। पशुओं के इलाज के लिए 10 पशु चिकित्सालय हैं और तहसील में कुल 33 हजार 596 पशु हैं। इनमें से 33 हजार 233 पशुओं का टीकाकरण किया गया। टीकाकरण के बाद भी 6 हजार 112 पशु लम्पि संक्रमण से ग्रसित हुए है और इनमें से 528 की मौत हो गई। 5 हजार 401 मवेशी बीमारी से ठीक हुए। 183 पशु अब भी लंपी संक्रमित से प्रभावित हैं। इनमें से 23 की हालत गंभीर है। शासन के निर्णय के अनुसार लंपी रोग से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए लंपी रोग से ग्रसित पशुओं का उपचार सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी को
करना आवश्यक है। उसके बाद कहा गया कि पशुपालकों को मदद मिलेगी. लंपी रोग के लिये कोई टीका नहीं बल्की गोटफॉक्स का टीका दिया गया
बॉक्स मे ले
किसानों एवं चरवाहों के मृत पशुओं को कसौटी के अनुसार सरकारी सहायता का प्रावधान, दुधारू पशुओं के लिए 30 हजार रुपये, काम वाले पशुओं (बैल) के लिए 25 हजार रुपये एवं बछड़ों के लिए 16 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई और
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टीकाकरण के बाद भी पशुओं की
हो सकती है, इसलिए जानवरो का गोठा साफ-सुथरा रखने और लंपी स्किन रोग से संक्रमित पशुओं को अलग रखने का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके लिए साइपर मेथिन औषधीय स्प्रे और आयुर्वेदिक नींबू की पत्ती के धुएं का छिड़काव करना चाहिए।
डॉ। एस। आर। चोपड़े, पशु चिकित्सा अधिकारी मोताला
