हम बात कर रहे हैं मलकापुर नगर पालिका चुनाव में आम जनता ने जिन प्रतिनिधियों पर भरोसा जताते हुए भारी बहुमत से उन्हें चुनकर भेजा, आज वही प्रतिनिधि कुछ दलालों की साजिशों का शिकार बनते नजर आ रहे हैं चुनाव के पहले भी और
चुनाव खत्म होते ही, विकास शुरू होने से पहले ही, कुछ दलाल अपने निजी फायदे के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधियों को परेशान करने की कोशिशों में जुट गए हैं
कभी शिकायतों के नाम पर, तो कभी कागज़ात निकालने के नाम पर, लगातार दबाव बनाने की साजिश रची रही है
ऐसे में एक शेर अपने आप ज़ेहन में आता है
“अभी तो आए हैं, अभी बैठे हैं, अभी दामन संभाला है,
लेकिन कुछ दलालों ने अपने फायदे के लिए उनके पूरे काग़ज़ निकाल हैं जिन चुने हुए प्रतिनिधियों ने अपने डॉक्यूमेंट इलेक्शन आयोग के सामने रखा है और उन्होंने उनको पास किया है लेकिन फिर भी चंद सिक्कों के लिए अपना जमीर बेचने वाले लोग कागज के नाम पर उन चुने हुए प्रतिनिधियों को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं ए से दलालों से भी चुन के आए हुए प्रतिनिधियों ने दूरी बनाए रखना चाहिए और इनका ध्यान में रखना चाहिए ऐसे दलालों के वजह से आम जनता का विकास नहीं होता है शहर में बहुत समय से विकास की नया अधूरी पड़ी थी अब आम जनता ने जिन्हें चुन के दिया है उनके ऊपर आम जनता की आशा है कि यह शहर का विकास और डेवलपमेंट करेंगे लेकिन
सवाल यह है कि क्या जनता के जनादेश का सम्मान होगा
या फिर दलालों की दलाली एक बार फिर लोकतंत्र पर भारी पड़ेगी
जनता ने जिस उम्मीदों के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना है, अब वही जनता यह भी देख रही है कि कौन विकास चाहता है और कौन रुकावटें पैदा कर रहा है अभी वह चुनकर आए हैं अभी वह वहां जाकर बैठे हैं वह कोई अलाउद्दीन का चिराग तो नहीं है कि चिराग को घास के यह कहेंगे कि यह काम हो जाए वह काम हो जाए उनको वहां बैठने के बाद कुछ महीने दो चार छे महीने तो लगेंगे कम से कम विकास के कामों की लाइन लगाने के लिए लेकिन दलाल लोग अपने फायदे के लिए उन्हें अभी से परेशान कर रहे हैं
आज ज़रूरत है सच्चाई को सामने लाने की, ताकि जनमत से चुने गए प्रतिनिधि बिना डर और दबाव के जनता के लिए काम कर सकें।
यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता के फैसले की लड़ाई है ऐसी मलकापुर शहर में चर्चा चल रही है

